उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान अधिनियम, 1965

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उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान अधिनियम, 1965
(उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 7, 1965)

विशेष पुलिस दल के रूप में उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के संगठन, अधीक्षण तथा प्रशासन की व्यवस्था करने के लिए

भारतीय गणतंत्र के सोलहवे वर्ष में निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता है:-

  • संक्षिप्त शीर्षनाम प्रसार

    1. यह अधिनियम उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान अधिनियम 1965 कहलायेगा।
    2. इसका प्रसार समस्त उत्तर प्रदेश में होगा।

  • सतर्कता अधिष्ठान का संगठन तथा अधिकार

    1. पुलिस एक्ट, 1861 में किसी बात के हेाते हुए भी राज्य सरकार धारा 3 के अधीन विज्ञापित अपराधों का अनुसंधान करने के लिए एक विशेष पुलिस दल संगठित कर सकती है, जो उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान कहलायेगा।
    2. किन्हीं भी एेसे आदेशों के अधीन रहते हुये जो राज्य सरकार तदर्थ, एेसे अपराधों का अनुसंधान करने तथा एेसे अपराधों से सम्बन्धित व्यक्तियों काे गिरफ्तार करने के सम्बन्ध में उक्त अधिष्ठान के सदस्यों को वे सभी अधिकार, कर्तव्य, विशेषाधिकार तथा दायित्व होंगे जाे एेसे अपराधों के अनुसंधान करने के सम्बन्ध में राज्य के सामान्य पुलिस दल के तद्नुरूप पद धारण करने वाले पुलिस अधिकारियाें काे है और तत्समय किसी विधि के अन्तर्गत अधिकार प्रदान किये जाने के निमित्त वे राज्य के सामान्य पुलिस दल में तद्नुरूप पद धारण करने वाले पुलिस अधिकारी समझे जायेंगे।
    3. उक्त अधिष्ठान का उप-निरीक्षक अथवा उससे ऊंचे पद का कोई सदस्य, राज्य सरकार द्वारा तदर्थ किये जाने वाले किन्हीं आदेशाें के अधीन रहते हुए, उपधारा (2) के अधीन अपने भी अधिकारों का प्रयाेग कर सकता है और जब वह उपर्युक्त किन्हीं एेसे आदेशों के अधीन रहते हुए ऐसे अधिकारों का इस प्रकार प्रयोग करे तो वह अपने थाने की सीमाओं के भीतर एेसे अधिकारी के कृत्याें का संपादन करने के लिये थाने का प्रभारी अधिकारी समझा जायेगा।
  • सतर्कता अधिष्ठान द्वारा अपराधों का अनुसंधान किया जाना

    राज्य सरकार, गजट में विज्ञप्ति द्वारा, ऐसे अपराधों अथवा अपराधों के एेसे वर्गों को निर्दिष्ट कर सकती है, जिनका अनुसंधान उत्तर प्रदेश, सतर्कता अधिष्ठान द्वारा किया जाना हो।

  • सतर्कता अधिष्ठान का अधीक्षण तथा प्रशासन

    1. उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान का अधीक्षण राज्य सरकार में निहित होगा।
    2. उक्त अधिष्ठान का प्रशासन राज्य सरकार द्वारा तदर्थ नियुक्त ऐंसे अधिकारी में निहित होगा जो सतर्कता निदेशक कहलायेगा और वह उक्त अधिष्ठान के सम्बन्ध में, राज्य के साधारण पुलिस दल के सम्बन्ध में पुलिस महानिरीक्षक द्वारा प्रयोक्तव्य एेसे अधिकारी का प्रयाेग करेगा जो राज्य सरकार तदर्थ निर्दिष्ट करे।
    3. इस अधिनियम में की गयी व्यवस्था के रहते हुए, पुलिस एेक्ट, 1861 और तद्धीन बनाये गये नियमाें तथा विनियमों के उपबन्ध जैसे कि वे राज्य के सामान्य पुलिस दल के सम्बन्ध में लागू होते हों उक्त अधिष्ठान के सदस्यों के सम्बन्ध में एेसे अनुकूलनाें के अधीन रहते हुए, चाहे वे परिवर्द्धन अथवा लोप के रूप में हों, लागू हाेंगे, जो राज्य सरकार द्वारा उनमें इस अधिनियम के प्रयाेजनों से संगत किये जायें।
  • निरसन तथा अपवाद

    1. उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान अध्यादेश, 1965 निरस्त किया जाता है।
    2. इस निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन दिया गया कोई कार्य अथवा की गयी र्कोई कार्यवाही, इस अधिनियम के अधीन किया गया कार्य अथवा की गयी कार्यवाही समझी जायेगी, मानो यह अधिनियम 5 जनवरी, 1965 को प्रारम्भ हुआ हो।
  • अपराध तथा अपराधों के वर्ग जिनका अनुसंधान सतर्कता अधिष्ठान द्वारा किया जाता है।

    निम्नलिखित अपराधों का अनुसन्धान उत्तराखण्ड सतर्कता अधिष्ठान द्वारा किया जाता है।

    1. भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 161, 162, 163, 164, 165, 165-ए, 166, 167, 168, 169, 182, 193, 197, 198, 201, 204, 211, 218, 342, 379, 380, 381, 384, 385,386, 387, 388, 389, 403, 406, 407, 408, 409, 411, 412, 413, 414, 417, 418, 419, 420, 465, 466, 467, 468, 471, 472, 473, 474, 475, 476, 477, 477-ए के अधीन दण्डनीय अपराध।
    2. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1947 एवं 1988 के अधीन दण्डनीय अपराध।
    3. इण्डियन आफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 के अधीन दण्डनीय अपराध।
    4. एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955 की धारा 7 व 8 के अधीन दण्डनीय अपराध।
    5. इण्डस्ट्रीज (डेवलपमेंट एण्ड रेगुलेशन) एक्ट 1951 की धारा 24 (1) (3) के अधीन दण्डनीय अपराध।
    6. खण्ड (क) से (ग) में उल्लिखित अपराधों से सम्बन्धित तथा उनसे सम्बद्ध प्रयास, उकसाना तथा षडयंत्र तथा अन्य कोई एेसे अपराध जो उसी कार्य के सम्पादन में किये गये हाें, अथवा उन्हीं तथ्यों से उत्पन्न हुए हों।
  • सतर्कत अधिष्ठान द्वारा ट्रैप की कार्यवाह

    1. जहां लिखित रूप में अधिष्ठान से यह परिवाद किया जाय कि किसी अराजपत्रित सरकारी सेवक या उसी पंक्ति के अन्य लोक सेवक ने किसी कार्य के करने के लिए भेंट या इनाम के रूप में किसी परितोषण (वैध पारिश्रमिक से भिन्न) करे, जैसा कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 161 में उल्लिखित है, मांग की है या उसे प्रतिगृहित करने काे सहमत हुआ है,

      एेसे लाेक सेवक को फंसाने या रंगे हाथ पकडने के लिए, परन्तु एेसी कार्यवाही केवल निम्नलिखित के पूर्व आदेश पर की जायगीः-

        सतर्कता निदेशक और उसकी अनुपस्थिति में पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय), सतर्कता अधिष्ठान, जब परिवाद अधिष्ठान के मुख्यालय में प्राप्त हो,

        सतर्कता अधिष्ठान के सेक्टर कार्यालय का प्रभारी पुलिस अधीक्षक आैर उसकी अनुपस्थिति में सेक्टर का प्रभार धारण करने वाला अधिकारी जब परिवाद सेक्टर कार्यालय में प्राप्त हो,

    2. जहां कोई ऐसा लिखित परिवाद न किया जाय, किन्तु कोई अराजपत्रित सरकारी सेवक या उसी पंक्ति का अन्य लाेक सेवक, एेसे लाेक कार्यालय के परिसर या परिसीमा, स्थान या गाडी में जहां पर एेसा लाेक सेवक सामान्यतः अपने कृत्यों का निर्व हन करता है या तत्समय कर्त्तव्य करने के लिए तैनात हो, उत्तरप्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के एेसे अधिकारी की उपस्थिति में, जो उपपुलिस अधीक्षक, सतर्कता अधिष्ठान की पंक्ति के नीचे का न हो, और इस प्रकार के मामलाें का पता लगाने, के प्रयोजनार्थ तैनात हो, किसी कार्य के करने के लिए भेंट या इनाम के रूप में कोई परितोषण, जैसा कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 161 में उल्लिखित है, प्रतिगृहित करते हुए पाया जाय, एेसे लोक सेवक को फंसाने या रंगे हाथ पकड़ने के लिए।
    3. सतर्कता अधिष्ठान अन्वेषण की प्रगति रिपोर्ट सरकार के सतर्कता विभाग के समक्ष प्रस्तुत करेगा, और अन्वेषण पूरा होने पर वह अपने निष्कर्षो और सिफारिशों समेत उसको सविस्तार रिपोर्ट आैर प्रस्तावित आरोप-पत्र की प्रतियां, यदि अभियोजन की सिफारिश की जाय, प्रस्तुत करेगा।