सतर्कता अधिष्ठान के कार्य संचालन को और उसके द्वारा जाच संचालन को विनियमित करने के लिये आदेश

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सतर्क ता अधिष्ठान के कार्य संचालन को आैर उसके द्वारा जॉच संचालन को विनियमित करने के लिये निम्नलिखित आदेश निर्गत हैः-

  • संगठन

    1. उत्तर प्रदेश, सतर्क ता अधिष्ठान अधिनियम, 1965 (जिसे आगे अधिनियम कहा गया है) को धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन संगठित सतर्क ता अधिष्ठान का मुख्यालय, लखनऊ में हाेगा।
    2. सतर्कता अधिष्ठान का प्रशासन पुलिस अतिरिक्त अथवा उप महानिरीक्षक से निम्न प्रास्थिति के अधिकारी में निहित होगा, जिसे सतर्कता निदेशक पदाभिहित किया जायेगा।
    3. सतर्कता निदेशक काे विभागाध्यक्ष की शक्तियाॅ होंगी और वह सीधे सरकार के सतर्कता विभाग के अधीन कार्य करेगा।

  • कृत्य

    सतर्कता अधिष्ठान निम्नलिखित कृत्यों का सम्पादन करेगाः-

    1. लोक सेवक से सम्बन्धित व भ्रष्टाचार, घूसखोरी, दुराचरण, दुर्व्यवहार आैर अन्य कदाचार के ऐसे समस्त मामले की जो, उसकी जानकारी में आये, सूचना सरकार को देना है।
    2. किसी ऐकिक लोक सेवक या किसी विभाग, वर्ग या श्रेणी के लोक सेवकाें के भ्रष्टाचार से संबंधित अभिसूचना काे अपनी पहल से या सरकार के सतर्कता विभाग के आदेश पर संग्रह करना,
    3. भ्रष्टाचार, घूसखोरी, दुराचरण, दुर्व्यवहार या अन्य कदाचार के मामलों में, जो उसे सरकार के सतर्कता विभाग द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किये जायें गुप्त या खुली जॉच आैर अनुसंधान करना। यह शर्त ’’ आदेश संख्या उ0प्र0 अधि0-7-65-आदेश 76(पंचम), दिनांक 16 अगस्त 1976 के अन्तर्गत आने वाले अराजपत्रित सरकारी सेवकों और तत्समान श्रेणी के लोक सेवकों विरूद्ध मामलाें में जाल बिछाने पर लागू न होगीः-

      परन्तु...................................

        सतर्क ता अधिष्ठान की पूर्ववत प्राधिकार है कि वह उसे अराजपत्रित सरकारी सेवक के विरूद्ध सरकार की पूर्व अनुज्ञा के बिना जॉच करे जिसका आचरण किसी एेसे राजपत्रित अधिकारी के आचरण के साथ अन्तर्ग्रस्त हो जिसके विरूद्ध सरकार ने जॉच करने का आदेश पहले ही दिया हो, किन

        किसी अराजपत्रित अधिकारी के विरूद्ध स्वतन्त्ररूप से जॉच या अनुसंधान करने के लिए सतरक ता अधिष्ठान सरकार से पूर्वदेश प्राप्त करेगा।

        (1)  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947 के अधीन मामलों में सतर्कता अधिष्ठान अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार केवल नियमित अनुसंधान करेगा।

      (2)  यदि जॉच के दाैरान सतर्कता अधिष्ठान के अधिकारियों को किसी एेसे सरकारी सेवक के विरूद्ध जिसके आचरण के बारे में उन्हें जाॅच करने को नहीं कहा गया हो, र्कोइ सूचना प्राप्त हो, तो सतर्क ता निदेशक एेसी सूचना सरकार के सतर्कता विभाग को आदेश के लिये अविलम्ब भेजेगा।

      (3)   सतर्कता अधिष्ठान को यह भी प्राधिकार है कि वह गैर सरकारी व्यक्तियाें आैर निजी व्यापार संस्थाओं के विरूद्ध, जिन्हें लोकसेवकों के भ्रष्टाचार में अर्न्त ग्रस्त पाया जाय, अनुसंधान करें, जिनके मामले जाॅच अनुसंधान के लिए उसे सौपे जायें।

      (4)  यदि किसी सरकारी सेवक के विरूद्ध जांच के दाैरान सतर्कता अधिष्ठान के अधिकारियों को उस सेवक के विरूद्ध घूसखोरी या दुराचार का र्कोइ एेसा अन्य मामला लिखे जो उनकाे पहले दिये गये आदेश के अन्तर्गत न आता हो, ताे सतर्कता निदेशक, सैक्टर कार्यालय या प्रभारी अधिकारी ऐसी सूचना तत्काल सरकार के सतर्कंता विभाग को अग्रेत्तर अनुदेश के लिये भेजेगा। यदि सतर्क ता अधिष्ठान का अधिकारी यह समझे कि तत्काल कार्यवाही न किये जाने पर ऊपर निर्दिष्ट घूसखोरी या दुाचरण के संबंध में साक्ष्य खो सकता है या उसमें हेर-फेर किया जा सकता है तो वह सरकार के आदेश प्राप्त हाेने तक एेसी कार्यवाही कर सकता है जिसे वह आवश्यक समझे, किन्तु इस प्रकार की र्गइ कार्यवाही की सूचना सरकार के सतर्क ता विभाग काे तुरन्त देगा।

  • शिकायतों के संबंध में कार्यवाही करने की प्रक्रिया

    1. सतर्क ता अधिष्ठान नीचे उप-प्रस्तर (2) में उल्लिखित शिकायतों से भिन्न अन्य प्राप्त शिकायतों की टिप्पणी सहित या रहित, सरकार के सतर्क ता विभाग को आदेशार्थ भेजेगा।
    2. निम्नलिखित प्रकार की शिकायतों पर र्कोइ कार्यवाही नहीं की जायेगी और उन्हें निक्षेप कर दिया जायेगा। जब तक कि किन्हीं विशेष कारणों से सतर्क ता निदेशक उन्हें सरकार को भेजने को विनिश्चय न करेंः-

        अनाम और छदमनामी शिकायत

        मुदि्रत पर्चे, पैम्पलेट आदि जिनकी प्रतियॉ सरकार के अनेक अधिकारियों काे भेजी र्गइ हों, और

         (शिकायत जो प्रथम दृष्टया सारहीन हो।

  • रिपोर्ट प्रस्तुत करना

    1. जिन मामलों में सतर्कता अधिष्ठान की जॉच या अनुसंधान करने काे कहा जाय, उन सभी मामलों में वह जॉच या अनुसंधान की प्रगति रिपोर्ट सरकार के सतर्क ता विभाग काे एेसे अन्तराल पर देगा जैसा सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाय।
    2. जब जॉच या अनुसंधान पूरा हो जाय, तब अधिष्ठान सरकार के सतर्कता विभाग अपने निष्कर्ष को समाविष्ट करते हुए सविस्तार आख्या प्रस्तुत करेगा, और

        यदि मामला अनुशासनिक कार्यवाही के लिये उपयुक्त पाया जाय तो आख्या के साथ आरोपों का प्रारूप भी भेजा जाना चाहिए। प्रत्येक आरोप के साथ दिये जाने वाले प्रस्तावित साक्ष्य को संक्षिप्ति आैर मामले का संक्षिप्त तथ्य होना चाहिए।

        (1)   यदि मामला न्यायालय को निर्दिष्ट किया जाना हाे तो अधिष्ठान सरकार के सतर्क ता विभाग को आदेश के लिये अपनी सविस्तार आख्या, आरोप-पत्र की दो प्रतियॉ और अन्य सुसंगत सामग्री सहित प्रस्तुत करेगा। किसी भी स्थिति में अधिष्ठान आरोप-पत्र को सीधे न्यायालय में प्रस्तुत नहीं करेगा।

      (2)   सतर्क ता अधिष्ठान द्वार पैरा 6 के उप-पैरा (1)के अधीन राज्य सरकार के निर्देश आैर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947 की धाराा6 या तत्समय प्रवृत्त किसी विवि के किसी अन्य उपबन्ध काे, जिसमें पूर्व स्वीकृति अपेक्षित हो, अपेक्षानुसार समूचित प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के पश्चात् ही आरोप-पत्र मा0 न्यायालय में दाखिल किया जायेगा।

  • शासन का सतर्कता विभाग सविस्तार आख्या की परीक्षा करने के पश्चात यह निश्चय कर सकेगा कि निम्नलिखित में से र्कोइ कार्यवाही की जाय

    1. उसे अभियोग चलाने के लिये आरोप-पत्र के साथ न्यायालय को भेजा जाय।
    2. उसे अनुशासनिक कार्यवाही के लिये प्रशासनिक अधिकरण को निर्दिष्ट किया जाय।
    3. उसे विभागीय कार्यवाही के लिये संबंधित प्रशासनिक विभाग को निर्दिष्ट किया जाय।
    4. उस मामले को समाप्त किया जाय।

  • क्रमांक

    प्रत्येक मामले में, समुचित प्राधिकारी द्वारा कार्यवाही की जायेगी जिसे उपर्यु क्त धारा 6 में बर्ताइ गयी र्कोइ कार्यवाही करने के लिये शासन के सतर्कता विभाग द्वारा आवश्यक आदेश दिया जाय।

  • क्रमांक

    सतर्कता निदेशक उन व्यक्तियों पर अभियोग चलाने की पहल कर सकता है जिन्हें लाेक सेवकों के विरूद्ध भ्रष्टाचार या सत्यनिष्ठा के अभाव या अन्य कदाचार की, मिथ्या या सारहीन शिकायत करने वाला पाया जाय।

  • कर्मचारीवर्ग

    राज्य सरकार सतर्क ता अधिष्ठान के लिये एेसे कर्मचारीवर्ग और उतने विधिक सलाहकारों और तकनीकी कर्मचारियों को व्यवस्था करेगी जितने सरकार अधिष्ठानों के कृत्यों का उचित रूप से संपादन करने के लिये समय-समय पर आवश्यक समझे।

  • क्रमांक

    1. जॉच या अनुसंधान करने वाले अधिष्ठान के किसी सदस्य को एेसा सभी शासकीय अभिलेख सुलभ होगा जाे जॉच या अनुसंधान किये जाने वाले मामले से संबंधित और कार्यालयाध्यक्ष या विभागाध्यक्ष, जिसकी अभिरक्षा में एेसा अभिलेख हाे, अनुसंधानकर्ता अधिकारी द्वारा एेसी मांग करने पर, तत्काल एेसा अभिलेख प्रस्तुत करेगा और अनुसंधानकर्ता अधिकारी की जॉच या अनुसंधान में सभी अन्य आवश्यक सहायता देगा।
    2. दन्ड प्रक्रिया संहिता के अधीन अनुसंधान के अन्तर्गत अपराध से संबंधित सम्पत्ति को कब्जा में लेने की शक्ति का प्रयोग, जहॉ तक उसका संबंध शासकीय अभिलेखों से है, अधिष्ठान के सदस्याें द्वारा तभी किया जायेगा जब वांछित अभिलेख के खाेजाने, नष्ट किये जाने अथवा उसमें हेर फेर किये जाने की पर्याप्त युक्तियुक्त आशंका हो, जिसे अनुसंधान में उल्लिखित किया जायेगा।
  • यह आदेश, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि प्रतिकूल बात के होते हुए भी, प्रभावी होगा।.